Saturday, 1 September 2018

मां की सीख
जाने कहाँ-से मिली के कमरे में सांप की मौसी घुस आयी और इधर उधर भागने लगी। जिसे देखते ही उसके मुंह से चीख निकल गयी। अपनी बच्ची की पुकार सुनते ही उसकी माँ दौड़ी आयीं। मिली दौड़कर अपने मां के आंचल में छिप गयी।
उसके बस्ते पर बैठी सांप की मौसी देख उसकी मां को माजरा समझ आ गया। वे मुस्कुरायीं और बोलीं-
मिली बेटा, ये सांप की मौसी है। नुकसान नहीं पहुंचाती। इनसे डरना नहीं चाहिए। ये हमारी और हमारे पर्यावरण की रक्षक हैंं। देखना कुछ ही देर में ये अपने आप चली जाएगी और तुम्हें पता भी न चलेगा। 
और सचमुच क्षण भी न बीते होंगे कि सांप की मौसी नजरोंं से ओझल हो गयी। डरी-सहमी मिली, मां के आंचल से निकली और बस्ते के साथ ही पूरे कमरे में देखा, वह कहीं न दिखी। इसे देख उसे अपनी मां की बात पर विश्वास हो गया।
दूसरे दिन उसके स्कूल में ड्राइंग कॉम्पिटीशन था। जिसमें मिली ने भी हिस्सा लिया था। उसने ड्राइंग शीट पर उसी सांप की मौसी का चित्र अपनी कूची-से बड़े ही खूबसूरत ढंग-से बना दी जो उसके बस्ते पर बैठी हुई है। मिली के इस चित्र ने प्रथम स्थान प्राप्त किया था। मां की सीख ने उसे कितना बड़ा पुरस्कार दिला दिया था।  
                            शिवनाथ शुक्ल
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