Thursday, 26 December 2019

मेरे प्राण,
कल रात आपसे बात कर इतना अच्छा लगा कि क्या बताऊँ। आपके विचार कितने सुन्दर विचार और प्रवाहमान हैं। इस पर हमें गर्व है। इसे बनाए रखिएगा। यह और अच्छा है कि आप समस्याओं से घबराने की बजाए उससे जूझ रहे हैं। संघर्ष कर रहे हैं। यही जीवटता की निशानी है जो व्यक्ति को सफलतम इन्सान बनाती है। कुशल तैराक वह नहीं जो बहती धारा में तैर कर नदी पार कर जाए बल्कि तूफानों और बवण्डर के बीच और वह भी धारा के विपरीत तैरकर पार उतर जाए वही कुशल तैराक कहाने का अधिकारी होता है। तो बेटे आप लगातार समस्याओं के झंझावातों से जूझ रहे और मुस्कुराते हुए अपनी मंजिल की ओर बढ़ रहे हो यही बड़ी बात है। इसके लिए हम आपको शुभकामनाएं देते हैं।
एक बात और, जीवन में बहुत दुश्वारियां आएंगी, मन निराशा-से भर उठेगा और तन-बदन में विद्रोह की लहर उठेगी तब याद रखना उन नावों को जो समुद्र के तूफान में फंसकर भी डूबती नहीं बल्कि लहरों को ही अपना जीवन बना लेती हैं जिस पर नाचते हुए इस प्रकार बढ़ती हैं मानों ये लहर ही उनकी पतवार हों। तो आप भी कठिनाइयों को अपनी ढाल बना लेना और उसी से सहारा लेकर बढ़ते जाना।
एक बात हर वक्त याद रखना कि आपको योग्य और कुशल डॉक्टर बनना है जो मानवता का कल्याण करने के लिए बना है। लक्ष्य यही हो कि कैसे समय से तालमेल, सहपाठियों से मेलजोल और वरिष्ठों से सीख कर अपनी मंजिल पा लें।
बाबा को ही देखो, उनके समक्ष कितनी कठिन परिस्थितियां नहीं आयीं लेकिन वे कभी घबराए नहीं। त्वरित फैसला करने और साहस के साथ आगे बढऩे की प्रवृत्ति ने ही उनका साथ दिए और वे अपने नाम का डंका बजाए। आप उनके जीवन से बहुत कुछ सीख सकते हो।
कल आपके फोन के बाद आपकी मम्मी और निखिल बहुत खुश थे। सब आपके बचपन की बातें करते थे कि कैसे आपके जीवनचर्या में बदलाव आया और कैसे आप उनसे तादाम्य बिठाकर चल दिए हो। हम लोग हँसते भी हैं और खुश भी होते हैं कि हमारा नीतीश कितना सुन्दर और ऊंचे विचारों का होता जा रहा है। आपको भगवान सदैव आगे रखें और आप अपने मकसद मेंं कामयाद होवो यही प्रार्थना है।
अस्तु.. शुभ।
शिवनाथ शुक्ला 

Tuesday, 24 December 2019

                       वह खुशनुमा शाम
वह 15 दिसम्बर की गम में डूबी खुशनुमा शाम थी, जब मुम्बई के जीटीबी नगर स्थित म्हाणा कॉलोनी के फ्लैट नं.-30 में तेजी-से सीढिय़ां चढ़ते आकर्षक वेश-भूषा में श्री ओंकारेश्वर मिश्र जी दिखे। देवरिया नरेश और गुरुग्राम के जाने-माने समाजसेवी इन शख्सियत को खिलखिलाते पुष्प की भाँति ताजादम देख हमारी आंखें हर्षित हो गईं। इसलिए भी, कि आप बड़े सदमे-से उबर कर आ रहे हैं और हम आपके स्वास्थ्य को लेकर बेहद चिन्तित हो रहे थे।
आप गुरुग्राम-से मुम्बई हमारी छोटी दीदी के ज्येष्ठ सुपुत्र के गौना-कार्यक्रम में सम्मिलित होने आए थे। पता चला, कि उड़ते विमान में ही आपकी तबीयत बिगड़ गयी। एक तरह-से आप बेहोश-से हो गए। विमान में उपस्थित दो चिकित्सकों ने आपका प्राथमिक उपचार किया। आप होश में आए।
मुम्बई के सान्ताक्रूज हवाई अड्डे पर उतरते ही सबसे पहले अस्पताल में जाकर आपने चेकअप कराया गया। जहां सारी जांच दुरुस्त निकली, लेकिन आराम जरूरी था। ऐसे मामलों में चिन्ता बढ़ ही जाती है, कि आखिर नीम बेहोशी भी आयी, तो क्यों? यह कोई संघातिक बीमारी तो नहीं!
                         (२)
बहरहाल, कुछ देर बाद ही पता चला, कि आदरणीय ओंकारेश्वर मिश्र जी पधार रहे हैं। हम चहक उठे और आश्चर्य में भी पड़े, कि बेहोशी के आलम-से उबरकर और थोड़ा ही विश्राम कर इतनी जल्द आप पधार भी रहे हैं! आपकी उत्कट जिजीविषा और अंधरे में भी उजाला भर देने की आपकी इस जानदार कोशिश ने हमें रोमांच-से भर दिया। मारे खुशी के हम लोग इन्तजार में बैठे, कि 6 बजे के आसपास मोबाइल ने घनघनाकर आपके पहुंचने का संकेत कर दिया। हम उठे और सीढिय़ोंं के समीप पहुंचे कि आगवानी तो करें। कि आप सहसा तेजी-से सीढिय़ों पर चढ़ते दिखे। इस शीत में भी गुनगुने जल की तरह बढ़ते आए और इससे पहले कि हमें झुक कर प्रणाम करते हमने चन्द्रमा की तरह शीतल व्यक्तित्व मिसिरजी को अपनी बाहों में भर लिया। कितने सुन्दर और लाजवाब व्यक्तित्व के मालिक श्री ओंकारेश्वर मिश्र जी।
एक मांगलिक कार्यक्रम के दौरान देवरिया में अपके पिताश्री-से हमारी संक्षिप्त मुलाकात में ही पता चल गया था कि परिवार में किस तरह संस्कार कूट-कूटकर भरे हुए हैं। आप में वही संस्कार भांति-भांति रूप में परिलक्षित होते रहे हैं। 
आपके साथ श्री ठाकुरजी भी थे जो गुडग़ांव-से ही आपके साथ आए हैं। ठाकुरजी भी गजब के जीवट व्यक्तित्व! पता चला कि उनकी किडनी फेल कर गई है। डायलिसिस पर चल रहे हैं। फिर भी चेहरा देखिए तो भान ही न हो। एकदम चमकदार और तेजोमय। इस संक्षिप्त समय में भी बहुत-से विषयों पर चर्चा हो गयी आप लोगों-से। राजनीति, समाज, अर्थ, भूूगोल, इतिहास, घर-परिवार, नाते-रिश्तेदारों-से लेकर बी-पॉजीटिव थिंक पॉजीटिव व्हाट्सएप ग्रुप और नामी शख्सियतों सहित किन-किन विषयों पर चर्चा न हुई। और देखिए, कि बातों-बातों में ही कब समय निकला और इशारों-इशारों में आपने चलने का संकेत पास कर दिया।
                           (३) 
बड़ी खुशमिजाजी-से उठे। निकलने-से पहिले नव-वधू को नेग देने के बाद हमारी श्रीमतीजी-से मिलने भीतर चले, कि चलें भाभी जी-से पहली मुलाकात तो कर लें। इतनी दूर-से आए हैं तो यह सौभाग्य क्यूं छोड़ें?
यह प्रसंग देखते ही हमें अपने कनाडा वाले पुल्हुर चाचा की याद हो आयी जो कनाडा-से अपने पैतृक गांव आजमगढ़ आते ही गोरखपुर के हमारे गांव खखाइचखोर में अम्मां-से मिलने सहज ही चले आया करते थे।
तो ओंकारेश्वर मिसिरजी बड़े प्रेम-से सबसे मुलाकात किए। दीदी और जीजा सहित बच्चों-से विदा लिए। हम आपके पीछे-पीछे चले। आप बड़ी तेजी-से सीढिय़ां उतरे मानों उर्जा-से लबरेज हों और अपनी लग्जरी कार की ओर बढ़े। हम और जीजाजी साथे थे। कुछ दूर पर आपकी मोटरकार खड़ी थी जहां पहुंच आप कार में पीछे की सीट पर विराजमान हुए। मोटरकार स्टार्ट हो गयी और बढऩे को हुई, कि आपने नजर हमारी ओर उठाईं जिनमें नेह के बादल घुमड़ रहे थे जो मानों कह रहे हों कि इतनी जल्द जाना अच्छा नहीं लग रहा।
फस्र्ट गेयर लगा और मोटरकार बढ़ी। आपने फिर हमारी ओर फिरकर देखा और हाथ जोड़े। कितने सरल, कितने सज्जन और कितने उदार..ठीक हमारे फुफा और फूआ की तरह। आज वे दोनों महामना तो नहीं हैं लेकिन ओंकारेश्वर मिश्र जी उनकी फूल-सी निशानी सुरंजना मिश्रा को बड़ी हिफाजत के साथ दाम्पत्य-पथ पर लिए चल रहे हंै। आप सपरिवार यशस्वी और कीर्तिशाली हों। ईश्वर आपको हर परिस्थितियों में महफूज रखें मिसिरजी।
उधर आपकी मोटरकार आहिस्ता-आहिस्ता बढ़ रही है और इधर मुम्बई का समुद्र मानों हमारी आंखों में उमड़ा जा रहा है। हमने बड़ी शिद्दत के साथ उसे हृदय में जज्ब किया कि मिश्रजी के नाम के मोती कहीं धरती पर न गिर पड़ें और धीरे-से अपने डग पीछे की ओर बढ़ा दिए। 
इस बीच आशाजनक खबर यह मिली है, कि मिसिर जी को जो उड़ते विमान में जो नीम-मुर्छा आई थी दरअसल वह किसी प्रकार की कोई बीमारी नहीं है। कुछ केमिकल लोचा है जो समय से व्यवस्थित हो जाता है। लेकिन ऐतिहात जरूरी है। सर्वशक्तिमान आपको स्वस्थ व प्रसन्न रखें यही प्रार्थना है।
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