मेरे प्राण,
कल रात आपसे बात कर इतना अच्छा लगा कि क्या बताऊँ। आपके विचार कितने सुन्दर विचार और प्रवाहमान हैं। इस पर हमें गर्व है। इसे बनाए रखिएगा। यह और अच्छा है कि आप समस्याओं से घबराने की बजाए उससे जूझ रहे हैं। संघर्ष कर रहे हैं। यही जीवटता की निशानी है जो व्यक्ति को सफलतम इन्सान बनाती है। कुशल तैराक वह नहीं जो बहती धारा में तैर कर नदी पार कर जाए बल्कि तूफानों और बवण्डर के बीच और वह भी धारा के विपरीत तैरकर पार उतर जाए वही कुशल तैराक कहाने का अधिकारी होता है। तो बेटे आप लगातार समस्याओं के झंझावातों से जूझ रहे और मुस्कुराते हुए अपनी मंजिल की ओर बढ़ रहे हो यही बड़ी बात है। इसके लिए हम आपको शुभकामनाएं देते हैं।
एक बात और, जीवन में बहुत दुश्वारियां आएंगी, मन निराशा-से भर उठेगा और तन-बदन में विद्रोह की लहर उठेगी तब याद रखना उन नावों को जो समुद्र के तूफान में फंसकर भी डूबती नहीं बल्कि लहरों को ही अपना जीवन बना लेती हैं जिस पर नाचते हुए इस प्रकार बढ़ती हैं मानों ये लहर ही उनकी पतवार हों। तो आप भी कठिनाइयों को अपनी ढाल बना लेना और उसी से सहारा लेकर बढ़ते जाना।
एक बात हर वक्त याद रखना कि आपको योग्य और कुशल डॉक्टर बनना है जो मानवता का कल्याण करने के लिए बना है। लक्ष्य यही हो कि कैसे समय से तालमेल, सहपाठियों से मेलजोल और वरिष्ठों से सीख कर अपनी मंजिल पा लें।
बाबा को ही देखो, उनके समक्ष कितनी कठिन परिस्थितियां नहीं आयीं लेकिन वे कभी घबराए नहीं। त्वरित फैसला करने और साहस के साथ आगे बढऩे की प्रवृत्ति ने ही उनका साथ दिए और वे अपने नाम का डंका बजाए। आप उनके जीवन से बहुत कुछ सीख सकते हो।
कल आपके फोन के बाद आपकी मम्मी और निखिल बहुत खुश थे। सब आपके बचपन की बातें करते थे कि कैसे आपके जीवनचर्या में बदलाव आया और कैसे आप उनसे तादाम्य बिठाकर चल दिए हो। हम लोग हँसते भी हैं और खुश भी होते हैं कि हमारा नीतीश कितना सुन्दर और ऊंचे विचारों का होता जा रहा है। आपको भगवान सदैव आगे रखें और आप अपने मकसद मेंं कामयाद होवो यही प्रार्थना है।
अस्तु.. शुभ।
शिवनाथ शुक्ला
कल रात आपसे बात कर इतना अच्छा लगा कि क्या बताऊँ। आपके विचार कितने सुन्दर विचार और प्रवाहमान हैं। इस पर हमें गर्व है। इसे बनाए रखिएगा। यह और अच्छा है कि आप समस्याओं से घबराने की बजाए उससे जूझ रहे हैं। संघर्ष कर रहे हैं। यही जीवटता की निशानी है जो व्यक्ति को सफलतम इन्सान बनाती है। कुशल तैराक वह नहीं जो बहती धारा में तैर कर नदी पार कर जाए बल्कि तूफानों और बवण्डर के बीच और वह भी धारा के विपरीत तैरकर पार उतर जाए वही कुशल तैराक कहाने का अधिकारी होता है। तो बेटे आप लगातार समस्याओं के झंझावातों से जूझ रहे और मुस्कुराते हुए अपनी मंजिल की ओर बढ़ रहे हो यही बड़ी बात है। इसके लिए हम आपको शुभकामनाएं देते हैं।
एक बात और, जीवन में बहुत दुश्वारियां आएंगी, मन निराशा-से भर उठेगा और तन-बदन में विद्रोह की लहर उठेगी तब याद रखना उन नावों को जो समुद्र के तूफान में फंसकर भी डूबती नहीं बल्कि लहरों को ही अपना जीवन बना लेती हैं जिस पर नाचते हुए इस प्रकार बढ़ती हैं मानों ये लहर ही उनकी पतवार हों। तो आप भी कठिनाइयों को अपनी ढाल बना लेना और उसी से सहारा लेकर बढ़ते जाना।
एक बात हर वक्त याद रखना कि आपको योग्य और कुशल डॉक्टर बनना है जो मानवता का कल्याण करने के लिए बना है। लक्ष्य यही हो कि कैसे समय से तालमेल, सहपाठियों से मेलजोल और वरिष्ठों से सीख कर अपनी मंजिल पा लें।
बाबा को ही देखो, उनके समक्ष कितनी कठिन परिस्थितियां नहीं आयीं लेकिन वे कभी घबराए नहीं। त्वरित फैसला करने और साहस के साथ आगे बढऩे की प्रवृत्ति ने ही उनका साथ दिए और वे अपने नाम का डंका बजाए। आप उनके जीवन से बहुत कुछ सीख सकते हो।
कल आपके फोन के बाद आपकी मम्मी और निखिल बहुत खुश थे। सब आपके बचपन की बातें करते थे कि कैसे आपके जीवनचर्या में बदलाव आया और कैसे आप उनसे तादाम्य बिठाकर चल दिए हो। हम लोग हँसते भी हैं और खुश भी होते हैं कि हमारा नीतीश कितना सुन्दर और ऊंचे विचारों का होता जा रहा है। आपको भगवान सदैव आगे रखें और आप अपने मकसद मेंं कामयाद होवो यही प्रार्थना है।
अस्तु.. शुभ।
शिवनाथ शुक्ला
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