मेरे प्राण,
कुछ दिन पहले और आज फिर आपकी कुछ फुटकर फोटुएं देख रहा था जो आपके बचपन से लेकर तरुणावस्था तक जुड़ी हुई हैं। उन सबमें आप कितने कोमल, कितने तेजोमय और आत्मविश्वास से लबरेज दिखायी देते हो। एक फोटो में तो सीमान्त ने आपकी फोटो पर टिप्पणी लिखी है, स्वामी विवेकानन्द जैसा व्यक्तित्व। यह बड़ी बात थी आपके लिए। और आपने दिखा भी दिया कि आप वाकई परिश्रम हिम्मत से आगे बढऩे वालों में हो।
एमबीबीएस की पढ़ाई तो आपने जो शुरू की वह सचमुच हमारे परिवार के लिए बड़े गर्व की बात रही। आज भी मैं रोमांच से भर जाता हूं और सीना तन जाता है कि मेरा बेटा एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा है। किसी भी पिता के लिए इससे बड़ी बात और हो भी क्या सकती है।
कभी-कभी तो मैं सोचता हूं कि किन जन्मों का फल है यह हमारे लिए। आंखें में आंसू भर आते हैंं यह सोचकर कि पुण्यों का फल तो जो है, है ही लेकिन इसमें आपकी कठिन साधना भी तो कितनी ज्यादा है। गम्भीर तबीयत के बीच भी वो कठिन पढ़ाई। सचमुच यह ऋषियों की साधना ही तो है।
बेटा, आप लगातार पढ़ रहे हो और कुछ न कुछ नया सोच भी रहे हो। मैं जब कभी आपसे बात करता हूं तो पाता हूं कि हमारा नीतीश दिनों दिन निखरता ही जा रहा है। यह बहुत बड़ी बात है कि घर-परिवार को एकाएक छोड़ कर आप वहां जम बन गए और अपना एक ऐसा परिवार तैयार कर लिया जो आप पर निछावर रहता है। आज भी आप सुबह जब बात किए तो मैं समझ गया था कि आज आपकी परीक्षा है इसलिए आप हमारा आशीर्वाद लेना चाहते हैं। मैंने निखिल से कहा भी आज नीतीश की परीक्षा है इसलिए सुबह फोन लगाया है। तुम्हें दन्तमंजन करता देख बड़े खुश हुए हम लोग। मम्मी और निखिल भी बहुत खुश हुए। तुम्हारा पर्चा खूब अच्छा हो और अच्छे नम्बरों से पास होओ यही प्रार्थना है भगवान से।
तुम्हारे पापा
कुछ दिन पहले और आज फिर आपकी कुछ फुटकर फोटुएं देख रहा था जो आपके बचपन से लेकर तरुणावस्था तक जुड़ी हुई हैं। उन सबमें आप कितने कोमल, कितने तेजोमय और आत्मविश्वास से लबरेज दिखायी देते हो। एक फोटो में तो सीमान्त ने आपकी फोटो पर टिप्पणी लिखी है, स्वामी विवेकानन्द जैसा व्यक्तित्व। यह बड़ी बात थी आपके लिए। और आपने दिखा भी दिया कि आप वाकई परिश्रम हिम्मत से आगे बढऩे वालों में हो।
एमबीबीएस की पढ़ाई तो आपने जो शुरू की वह सचमुच हमारे परिवार के लिए बड़े गर्व की बात रही। आज भी मैं रोमांच से भर जाता हूं और सीना तन जाता है कि मेरा बेटा एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा है। किसी भी पिता के लिए इससे बड़ी बात और हो भी क्या सकती है।
कभी-कभी तो मैं सोचता हूं कि किन जन्मों का फल है यह हमारे लिए। आंखें में आंसू भर आते हैंं यह सोचकर कि पुण्यों का फल तो जो है, है ही लेकिन इसमें आपकी कठिन साधना भी तो कितनी ज्यादा है। गम्भीर तबीयत के बीच भी वो कठिन पढ़ाई। सचमुच यह ऋषियों की साधना ही तो है।
बेटा, आप लगातार पढ़ रहे हो और कुछ न कुछ नया सोच भी रहे हो। मैं जब कभी आपसे बात करता हूं तो पाता हूं कि हमारा नीतीश दिनों दिन निखरता ही जा रहा है। यह बहुत बड़ी बात है कि घर-परिवार को एकाएक छोड़ कर आप वहां जम बन गए और अपना एक ऐसा परिवार तैयार कर लिया जो आप पर निछावर रहता है। आज भी आप सुबह जब बात किए तो मैं समझ गया था कि आज आपकी परीक्षा है इसलिए आप हमारा आशीर्वाद लेना चाहते हैं। मैंने निखिल से कहा भी आज नीतीश की परीक्षा है इसलिए सुबह फोन लगाया है। तुम्हें दन्तमंजन करता देख बड़े खुश हुए हम लोग। मम्मी और निखिल भी बहुत खुश हुए। तुम्हारा पर्चा खूब अच्छा हो और अच्छे नम्बरों से पास होओ यही प्रार्थना है भगवान से।
तुम्हारे पापा
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