हर दिन कोई-न-कोई सन्देश लेकर आता है। जैसे आज का सन्देश बारिश की फुहारों ने दिया है, बलखाती हवाओं ने दिया है और काई से निखरी दीवारों ने दिया है..कि भीगने न डरो। भीगो और खूब भीगो ; लेकिन याद रहे- करुणा में भीगो, ममता और चरित्र की चाशनी में भीगो..इस भीगने का अर्थ है। साथ ही दूसरों को भी अपनी करुणा से भिगोवो। याद रखो, ईश्वर अपने आशीर्वाद से चराचर को भिगोते हैं और इन रिमझिम फुहारों से हम पर अपनी करुणा बरसाकर निहाल करते हैं। हमें भी इनसे यही सीखना है।