आज़ छठ है। बिहार में महिलाएं इस दिन अपने बच्चों की खुशहाली के लिए सूर्योपासना करती हैं। हमारी अम्मां उ.प्र. से थीं, व्रत की महिमा सुनीं तो चट तैयार हो गयीं और बिहारी व्रतधारिणियों के साथ गाते-बजाते गांव के बाहर वाले पोखरे पर पहुँच गयीं। यहाँ हम यहाँ सुने तो हतप्रभ ! अम्मां हमारी सलामती के लिए कितना तो मरती हैं। हर साल जिउतिया में चौबीसों घंटों निर्जला उपवास भी तो हमारे लिये ही करती हैं, फिर यह छठ ! तीन-चार दिनों की कठिन साधना का व्रत। मैंने ठाना, कितना भी व्यस्त रहूँ, अबकी छठ में अम्मां के पास गांव में रहूंगा। समय आया तो गांव पहुँच गया। मुझे पाकर मानो उनके पांव ज़मीन पर ही न पड़ते थे। हम हाटा बाज़ार से पूजा की सामग्री खरीद लाये और सिर पर लिए अम्मां की टोली वाली महिलाओं के साथ तालाब चले . खूब गाना-बजाना हो रहा था। हमने कनखियों से देखा, आहा ! अम्मां के गाने का स्वर कितना ऊंचा और सुरीला हो गया था। क्यों न हो ? किसी गाय को उसका गुम हुआ बछड़ा मिल जाये, गाय की क्या मनोदशा होगी? अम्मा मुझे पाकर बेहद उत्फुल्ल थीं। हम भी कम खुश न थे। अम्मां थीं, गांव था ; पाइमरी जहाँ पढ़ा वो स्कूल था। हमने माँ की साधना देखी तो देखते रह गए !
फिर तो हम छठ में अम्मां यहीं बुला लेते, सेक्टर २ तालाब पर वे पूरे परिवार के साथ अर्ग देतीं। आज अम्मां नहीं हैं। जाने किस दुनियां में गयीं, फिर कभी न आने के लिए.. हमारे सलामती की दुआ करने वालीं अम्मां नहीं हैं. लगता है इसीलिए हमारा एक्सीडेंट हो गया, लेकिन उन्हीं के आशीर्वाद से हम बच भी गए। हाथ पर प्लास्टर चढ़ा है।
छठ के गीत, हाथ पर चढ़ा प्लास्टर अम्मां की याद दिला रहे हैं। आप हो कहाँ अम्मा ? हम रो भी तो नहीं पा रहे हैं। लगता है आप आँचल पसारे खड़ी हो और कह रही हो, एक बूँद आंसू गिरने न दूंगी। अम्मां! हम छठ मैया से जनुपात प्रणिपात करते हैं, आप जिस दुनिया में हों, जहाँ भी हों वैसे ही हंसती रहना .
फिर तो हम छठ में अम्मां यहीं बुला लेते, सेक्टर २ तालाब पर वे पूरे परिवार के साथ अर्ग देतीं। आज अम्मां नहीं हैं। जाने किस दुनियां में गयीं, फिर कभी न आने के लिए.. हमारे सलामती की दुआ करने वालीं अम्मां नहीं हैं. लगता है इसीलिए हमारा एक्सीडेंट हो गया, लेकिन उन्हीं के आशीर्वाद से हम बच भी गए। हाथ पर प्लास्टर चढ़ा है।
छठ के गीत, हाथ पर चढ़ा प्लास्टर अम्मां की याद दिला रहे हैं। आप हो कहाँ अम्मा ? हम रो भी तो नहीं पा रहे हैं। लगता है आप आँचल पसारे खड़ी हो और कह रही हो, एक बूँद आंसू गिरने न दूंगी। अम्मां! हम छठ मैया से जनुपात प्रणिपात करते हैं, आप जिस दुनिया में हों, जहाँ भी हों वैसे ही हंसती रहना .
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