Sunday, 3 November 2013

  ऐसा दीप जलाओ माँ 


मलिन मन आलोकित होये 
ऐसा दीप जलाओ माँ
अंतर्मन का तमस मिटे
सत्यमार्ग दिखलाओ माँ
तनिक कसावट से जो टूट के बिखरे
उन मनकों को मिला
माला पुनः बनाओ माँ
मन के टूटे तार जुटें
झंकृत हों
वीणा फिर से बजाओ माँ
घर-घर खुशियाँ झूमें-नाचें अब फिर
दुष्ट-वृत्ति के अधम-असुरों को संहारो माँ
वाह्य नहीं अंतर्मन चमके
ऐसा दीप जलाओ माँ

शिवनाथ शुक्ल
लिंक रोड, कैंप-२ भिलाई, ४९०००१
(छत्तीसग़ढ़) 

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