Baba
Thursday, 30 July 2015
समय
बुढ़ाने लगा है समय
जा रही है उसकी जवानी
वह तरुण समय मुस्कुरा रहा है
और देखो तो
उस चंचल बाल-समय की चपलता
अपनी ही धुन कितना तो
मस्त है
उसे कहाँ परवा किसी की
समय से सिखेगा
समय की परिभाषा
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