Wednesday, 2 December 2015

चेन्नई के जल-प्रलय ने हिलाकर रख दिया है। वहां वेलूर के अरीयूर गांव से हमारे मित्र अन्बलगन राजगोपाल ने सन्देश दिया है कि वे बारिश में फंसे हैं। वे सुरक्षित हों और पानी की बाढ़ अब तो चराचर को डुबोना बन्द करे, उस सर्वशक्तिमान से प्रार्थना है।
यह डेल्यूज ऐसे समय हुआ है जब दुनिया भर के ४० हज़ार के करीब लोग पेरिस में जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर एकजाई हुए हैं। न केवल भारत बल्कि पूरा विश्व प्राकृतिक तबाही का शिकार हो रहा है। इसके साथ ही जलवायु परिवर्तन और खतरनाक रूप से मोड़ लेने लगा है। हमने ध्यान न दिया और यही गति रही तो अनुमान के मुताबिक २१०० तक ४. ५ डिग्री सेल्शियस तक तापमान की वृद्धि तय है, जो बड़े विस्फोट की ओर इशारा करती है। यदि वर्तमान नीति पर चले तो यह ३. ६ डिग्री सेल्शियस तक स्थिर हो सकता है, यह भी बहुत है। इसीलिए पेरिस समझौते को स्वीकार करने की बात चल रही है जिसके मुताबिक चलने पर तापमान वृद्धि २. ७ डिग्री सेल्शियस तक ही बढ़ सकेगा। २ डिग्री सेल्शियस की दर से ज्यादा बढ़ते जलवायु का कितना बड़ा दुष्परिणाम हमारे वैज्ञानिकों ने १९८० में खोजा कि ओजोन परत में छेद दिखाई दिया। इस प्रकार के छेद बढ़ते रहे तब तो कायनात ही नष्ट हो जाएगी।
चिंता यह है कि 'कॉप-21' सम्मेलन में विकासशील और गरीब देशों पर ही दबाव पड़ेगा कि वे अपने यहाँ कार्बन-उत्सर्जन में कटौती करें। इससे बात बनेगी नहीं। क्यों अपना विकास प्रभावित करेंगे गरीब देश ? लिहाजा उम्मीद है कि १९५ देशों के समृद्ध और कम आबादी के साथ ही अच्छी आय वाले देश समझौता करें और जीवन देने वाली इस सुन्दर-सी पृथ्वी को हरा-भरा बनाकर बेहतर जीवन दें।  

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