Friday, 17 June 2016

     सब्जियों के दाम आसमान छू रहे हैं! टमाटर और पेट्रोल की कीमतें लगभग समान होने को हैं! दालें तो कबकी दूर हो चुकीं हैं थाली-से! अब फिर डीजल-पेट्रोल का दाम बढ़ा है, तो स्वाभाविक है कि फिर-से वस्तुओं के दाम बढ़ेंगे ही। परिवहन चार्ज बढऩे का सीधा असर आवश्यक वस्तुओं पर ही पड़ता है। ऐसे में क्या स्थिति होगी आम आदमी की? वह तो पहले ही दुब्बर हुआ जा रहा है, फिर-से उस पर मंहगाई का बोझ लादते जाने-से तो डर है, कि कहीं उसकी कमर ही न टूट जाए। देखा जाए तो आज की डेट में अगर कोई पिस रहा है, तो वह आम मध्यवर्ग है, जिसकी कि संख्या बहुतायत है। गरीब रेखा-से नीचे जीवन यापन करने वाले ऐसे लोग जिनका नाम सरकारी पंजी में दर्ज है उन्हें सस्ता चावल तो मिल जा रहा है, लेकिन सवाल है कि केवल चावल से ही तो नहीं हो जाता न? सब्जी-भाजी, दूध, मसालों से लेकर चायपत्ती, तेल, नमक, बे्रड आदि भी तो हैं जो बहुत नहीं तो थोड़े पोषण आहार के रूप में तो जरूरी हैं। फिर बच्चों की फीस, इलाज का खर्चा अलग ही है। उसकी व्यवस्था कैसे होगी? फिर आम मध्यवर्ग की ओर देखें तो उस बेचारे के पास तो चावल तक का सुभीता नहीं है। आज की डेट में गिरे-से-गिरे चावल की क्या स्थिति है मार्केट में भला किससे छिपा है? एचएमटी से नीचे कोई खाने लायक चावल भी नहीं मिलता। ऐसे में वह क्या करेगा?
फलों के दाम आसमान छू रहे हैं। आम को ही देख लीजिए, मौसमी फल है। बड़ों से लेकर बच्चों तक को यह बहुत पसन्द रहता है। लेकिन उसका मूल्य कोई सुन ले तो देखे न उस ओर। गरीब तो छोडि़ए, आम मध्यवर्ग आम की ओर से विमुख हुआ है। एक आम खाने के लिए भी सोचना पड़ा है। अन्य फलों की भी कमोवेश यही स्थिति है। फिर आम आदमी करेगा क्या?
यह समझ नहीं आता कि लोकतान्त्रिक व्यवस्था में तन्त्र को देखिए तो वह तो फल फूल रहा है, लेकिन लोगों की दशा दयनीय रूप से गिरती जा रही है। यह विडम्बना की ओर इशारा नहीं तो और क्या है? दो नम्बरी और चार सौ बीस करने वाले मिठलबरे, भ्रष्ट ठेकेदार, नेताओं की जिन्दगी देख लीजिए तो अच्छे पढ़े-लिखे और सभ्य समाज के लोग सिर नीचा कर सोचने लगते हैं कि क्या इसी दिन के लिए कुर्बानी हुई थी हमारे महान नेताओं की! दरसल सचाई तो यह है, कि जनसाधारण एकमत नहीं है। वह वर्गों में विभक्त है इसीलिए उसकी आवाज उठ नहीं पाती और नीति नियन्ता मनमानियां करते हैं। लेकिन यह दशा ठीक नहीं है। इससे तो स्थितियां सुधरेंगी नहीं। इसके लिए तो आम आदमी को एक होकर अपने हक के लिए आगे आना ही होगा।
००००००००

No comments:

Post a Comment