Monday, 7 December 2020

                                                दिनांक- 08/12/2020
प्रिय बेटे नीतीश,
तीन ही दिन हुए लेकिन लगता है कि कितने बरस हो गए आपके गए! नौ महीनों के लगातार साथ का मानो कोई मोल ही नहीं। सचमुच इतने दिनों तक हमारा एकसाथ रहना लगता है कुछ था ही नहीं। समय कैसे फुर्र हुआ और कैसे मेडिकल कॉलेज से आपका बुलावा आ गया मानो सपने की तरह हो। आप के जाने के बाद मम्मी लगातार आपको याद कर रोती हैं तो निखिल हर वक्त किसी-न-किसी बहाने आपकी ही चर्चा छेड़ देता है। उसे भी आपकी कमी खल रही है। दोनों भाई जिस तरह एक दूजे का साथ देकर बढ़ते रहे और राग-अनुराग के बीच मेरा ख्याल रखे वह अभिभूत करती है। आप दोनों का रात में टीवी ऑन कर एक साथ भोजन करना, बातें करना और ज्ञानप्रद बातों का आदान-प्रदान करना ऐसा रहा जो आपसी मुहब्बत और सामंजस्य को और प्रगाढ़ करता है। आप दोनों ने मिलकर मेरी और मम्मी की छोटी-छोटी खुशियों का भी ख्याल रखा। मेरे बीमार होने पर आप दोनों ने मिलकर जिस अद्भुत मनोवैज्ञानिक और सामाजिक तरीके-से घर को सम्भाला, मुझे और मम्मी को हिम्मत और साहस दिया वह बेमिसाल है।  
आप निकले तो हम तो आपके स्वास्थ्य को लेकर बहुत चिन्तित हो गए। मैं तो फिर भी जानता था कि आप पूरी तरह फिट हो और घबराहट का फोबिया दूर कर लोगे, लेकिन मम्मी परेशान थीं। उनके लगातार रोने की वजह से मुझे उन्हें कई बार डाँटना भी पड़ा। लेकिन जब निखिल ने बताया कि रास्ते में आपने पौष्टिक चीजें खा ली हैं तो बहुत संतोष हुआ। फिर जब आपने बताया कि मेडिकल कॉलेज द्वारा की गई आपमें कोरोना टेस्ट की दोनों रिपोट्र्स निगेटिव निकलीं तो मन बाग-बाग हो गया। यह भी सुकून देने वाला रहा है कि नौ महीनों के गैप के बाद अपने को मनोवैज्ञानिक रूप तैयार कर, बहुत से सामानोंं के चोरी के बाद भी सब मैनेज कर और अपने को प्रसन्न रख आप व्यवस्थित होते रहे। ऐसे सकारात्मक प्रयास की हमें कामयाबी की राह दिखाते हैंं। समय से उठ  कर कमरे की सफाई, कम्बल-चद्दर से लेकर अन्य कपड़ों को धोना और फिर लगातार पढ़ते रहना..ये ऐसे कर्तव्य हैं जिन्हें मनोयोग से करके आपने न केवल अपने आप को बल्कि ईश्वर को भी प्रसन्न किया। भगवान उसी का साथ देते हैं जो अपने कर्तव्य, अपनी जिम्मेदारियां, अपने उत्तरदायित्वों के प्रति सचेत रहता है। ये सद्गुण हैंं इन्हें हर किसी को अपनाना चाहिए। मेरे बाबा इस मामले में बहुत आगे थे। आपको बताऊं कि वे अपने कर्तव्य-पथ पर ऐसे डटे रहते थे कि बड़ी-से-बड़ी निराशा और मायूसी भी उनके पास फटकने से डरती थीं। यही वजह रही कि वे भौतिक रूप से आज नहीं हैं उसके बाद भी हमारी आजीविका में उन्हीं का हाथ है। तो आप उन्हीं पदचिह्नों पर बढ़ते रहिएगा। यहां हम लोग बहुत अच्छे से हैं। मम्मी स्वस्थ हैं और निखिल पूरी निष्ठा और लगन के साथ अपनी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। आप अपनी शुभकामनाएं उन्हें देते रहिएगा ताकि उनका मनोबल बढ़ता रहे।   
अपने स्वास्थ्य का ख्याल रखना, खासकर नाश्ता और भोजन का। क्रीड़ा  गतिविधियों में हिस्सा लेते रहिएगा। फल और दूध जरूर लेते रहिएगा। टेलीफोन हर रोज होना चाहिए इसके बिना मम्मी का चेहरा फूल जाता है। ठीक है बेटा, खुश रहो..फिर बाते करेंगे।
आपके पापा

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