Tuesday, 20 July 2021

मुंबई में छ: दिन इस बार मुंबई प्रवास ऐसे समय हुआ जब हमारे छोटे जीजा डॉ. प्रदीप कुमार मिश्र के कमर दर्द को ठीक करने के लिए चिकित्सकों को शल्य क्रिया करनी पड़ी और वे महीने भर के विश्राम पर थे। उन्हें देखने हम ऊषाजी और बाबू निखिल के साथ गए थे। यों वहां रिश्तेदारी में एक मंगल-निमन्त्रण था, उसमें भी शामिल होना था। 12 जुलाई को हावड़ा-मुंबई मेल से हमारी टिकिट थी। एस-7 में आरक्षण सुरक्षित हो गया था। दुर्ग रेलवे स्टेशन पर हमारी ट्रेन समय से मिली और हम अपने कूपे में बैठकर रवाना हो गए। चूंकि कोविड काल चल रहा है सो चेहरे पर मास्क और हैंडवाश सहित अन्य सावधानियां बरतते हुए हम अलसुबह मुंबई सीएसटी रेलवे स्टेशन उतर गए। वहां पसरी वीरानी इस बात की गवाही कर रही थी कि कोरोना की विभीषिका ने इस महानगर को कितने गहरे घाव दिए हैंं। नहीं तो यही पहले था कि इस रेलवे स्टेशन पर पैर रखने की जगह न मिलती थी। लोग एक-दूसरे पर चढ़े आते थे। जन सैलाब के बीच अपनों के खो जाने का भय बना रहता था, यही वजह थी कि हम एक दूसरे की उंगलियां पकड़कर चलते थे। लेकिन इस बार एकदम सन्नाटा। ट्र्रेन से उतरते ही पीपीई किट पहने कर्मचारियों ने यात्रियों को एक लाइन में खड़ा कर दिया। सभी को आधार कार्ड निकालने कहा गया। वहां डॉक्टर हर किसी का कोरोना टेस्ट कर रहा था। हम सोचे यह प्रोसेस लम्बा चलेगा। आधार कार्ड भी हम भूल गये थे। लेकिन कोरोना वैक्सीन की दोनों डोज का प्रमाण पत्र पास था। हमने यह बात उन्हें बताई तो उनने प्रमाण पत्र का मुआयना किया और हमें जाने दिया। इससे बड़ी खुशी मिली। हम धन्यवाद दे लोकल टे्रन की ओर बढ़े कि सामने हमारे प्रिय भांजे सन्नी दिखे। हमें रिसीव करने आए थे। हमने कोरोना संक्रमण का हवाला दिया तो मुस्कुरा उठे। "नहीं मामा, सावधानियां बरत कर आया हूं।" वे भारतीय वायुसेना में हैं। इसी वजह से एयर फोर्स के हॉस्पिटल में जीजा का सफल ऑपरेशन सम्भव हुआ। तो हम टिकिट कटाकर लोकल पर सवार हुए और जीटीबी नगर उतर गए। वहां टैक्सी से छोटी दीदी के घर। क्रमश:- 2 ००००

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