Tuesday, 27 July 2021

(7) रसोई में आवाज सुन नींद खुल गई। देखा तो दीदी चाय पका रही थीं। याने सुबह हो गई है और इन लोगोंं के बेड टी का टाइम हो गया है। हम तो बेड टी के आदी नहीं। जीजा और दीदी ने चाय पी तब तक पानी खुल गया। हम फारिग हुए और अखबार पढऩे लगे। पुराना अखबार था लेकिन एडिटोरियल पर एक स्टोरी मिल गयी थी और स्टोरी कहां पुरानी होती है। उसी को लगे पढऩे। तब तक बाबू शुभम नीचे जाकर गरमागरम मसाला दोसा, इडली सांबर लेकर आ गए। नाश्ता हुआ। तब तक दिलीप जीजा आ गए ड्यूटी से। उनसे बातचीत करने लगे तो एक घंटा कट गया। दीदी ने आम काट दिया। दो-एक फांकी खाए और बातचीत करते रहे कि दोपहर हो गयी। दीदी ने भोजन परोस दिया। चावल-दाल, रोटी-सब्जी बहुत ही स्वादिष्ट। भोजन पश्चात थोड़ा विश्राम किए और फिर अपराह्न बेला में जीजा से बौद्धिक चर्चा होने लगी। उनके पास तो ज्ञान और अनुभव का भंंडार है। माक्र्सवाद से लेकर राष्ट्रवाद तक की बारीकियों पर चर्चा हुई। उनसे बात करो तो कई विमर्श परत-दर-परत खुलने लगते हैं। अरस्तू और प्लेटो से लेकर नेपोलियन तक का दृष्टान्त! सोचे, चलें थोड़ा बाहर घूम आएं, लेकिन बारिश होने लगी है। फिर बैठे तो दीदी ने अनार लाकर रख दिया। अनार को छीले और जीजा को खाने को दिए। अपने भी एक अनार का स्वाद लिए। फलों में अनार और सन्तरे का कोई जवाब नहीं। वैसे फल तो सभी स्वास्थ्यवर्धक होते हैं लेकिन जो चीज अनार और सन्तरे में है, वह और फलों में कहां? पेट भरना हो तो केला या सेब खा लीजिए लेकिन अनार और सन्तरे आप के पेट चाहे न भरें लेकिन पौष्टिकता भरपूर देंगे। तो अनार खाकर हम बरामदे में पहुंचे और वहां लेटे दिलीप जीजा से चुहल करने लगे। शाम की चाय तैयार हो रही है लेकिन अपुन को चाय से कोई मतलब नहीं। बस बातों का ही खजाना है जिसे भरते रहे और खाली करते रहे। रात हो गई है। बारिश चालू है। भोजन करते हैं और सो जाते हैं। सुबह बोरीवली की तैयारी करनी है। ऊषाजी और निखिल वहीं हैं। ऊषाजी अपनी बड़ी बहिन से भूली बिसरी बातें करने में मशगूल होंगी। दोनों बहिनें बड़े दिनों बाद मिली हैं। विचार करते-करते नींद लग जाती है। क्रमश:- 8 ०००००

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