Monday, 25 August 2014

वह रो रहा था
अपने आप पर या दूसरों पर यह तो नहीं पता
किन्तु वह रो रहा था
उसके रुदन में अट्टहास का पुट था
वैसे ही जैसे सियार रोते हैं
किसी मोटे शिकार को देखकर और बुलाते हैं
साथियों को अपने
वह रो रहा था
सहसा उसका रोना
बदल गया हंसी में
अब वह हँस रहा था
पता नहीं किस पर

              -शिवनाथ शुक्ल

Tuesday, 12 August 2014

                                              आँसू  

तालियों की गड़गड़ाहट और बड़े साहब के सीना मिलाकर गले मिलने से भाव विभोर हो गए त्रिवेदीजी। लम्बी अवधि की नौकरी के बाद आज वे सेवानिवृृत्त हो रहे हैं।
यही साहबान हैं जो कल तक साँस तक न लेने देते। और-तो और अपने काम का बोझ भी उन्हीं पर लादे देते थे। लेकिन आज है, कि उन्हें गले लगाया जा रहा है। अच्छा है, विश्रांति की बेला में साहब का यह स्नेह कम-से-कम शेष जीवन को तो सुकून देगा।
'स्वागत है त्रिवेदीजी, आपने हमारी कम्पनी की तरक्की के लिए जीवन लगा दिया अपना। आपकी ईमानदारी, लगन और निष्ठा के साथ ही कम्पनी के प्रति वफ़ादारी के कायल हैं हम।' कहते हुए साहब ने एक बड़ा-सा पैकेट त्रिवेदीजी को थमाया- 'यह रहा आपका इनाम।'
आँखें छलक पड़ीं त्रिवेदीजी की। काम के लिए आदेश देने वाले होंठो से सत्कार के मुलायम शब्द, यह इनाम, साहब की सहृदयता पर वे नतमस्तक हो गए।
निकलने लगे, तो साहब ने कहा- ' यार त्रिवेदी, एक काम करना; घण्टे भर लगेंगे, जाते-जाते ज़रा आज के फ़ाइल का निबटारा तो करते जाना।'
मानो त्रिवेदीजी आसमान से गिरे। हाथ में रखा इनाम मानो उपहास कर रहा हो, ' लो सेवानिवृत्ति का असली इनाम तो यह है कि जाते-जाते भी करते जाओ काम।'
उनकी आँखें फिर छलक पड़ीं ! कृतज्ञता के नहीं, साहब की कृतघ्नता के आंसू थे।

Saturday, 9 August 2014

                                           भिलाई के पत्रकारों का ढाई लाख का दुर्घटना बीमा

न्यू प्रेस क्लब ऑफ़ भिलाई ने इस वर्ष पत्रकारों के बीमा राशि के दायरे को बढ़ाकर ढाई लाख रूपये कर दिया है। अब पत्रकारों को नेशनल इंश्युरेंस कंपनी द्वारा ढाई लाख रुपये तक एक्सीडेंट रिस्क कवर मिलेगा। प्रेस क्लब व राज्य सरकार के दुर्घटना बीमा का लाभ पत्रकारों के साथ ही प्रेस दफ्तरों में काम करने वाले कंप्यूटर ऑपरेटरों व सभी प्रकार के प्रेस वर्करों को भी प्राप्त हो इस दिशा में प्रयास शुरू कर दिए गए हैं। भिलाई प्रेस क्लब के अध्यक्ष शिवनाथ शुक्ल ने बताया कि पिछले वर्ष १ लाख रूपये के दुर्घटना बीमा के दायरे को बढ़ाया गया है, लक्ष्य ५ लाख रूपये का है। बीमा के साथ ही पत्रकारों के राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा (स्मार्ट कार्ड), पत्रकार कॉलोनी फेस-२ निर्माण की प्रक्रिया जारी है। इसके साथ ही राज्य सरकार द्वारा पत्रकारों के ५ लाख के दुर्घटना बीमा व वरिष्ठ पत्रकारों को पेंशन के दायरे को बढाने का भी प्रयास किया जा रहा है।