Thursday, 14 May 2015

उस माँ के बारे में सोच रहा हूँ, कितनी पुलकित होगी वह इन दिनों. बेचारी के पति बीच रस्ते दगा दे गए. एक बेटा था, उसे पढ़ाने की जिम्मदारी थी. कैसे करे? वह दृढ़निश्चयी थी, ठान लिया माँ के साथ पिता का दायित्व भी निभाऊंगी. उसने जज्बे के साथ बेटे को पढ़ाया और पंजाब टेक्नीकल यूनिवर्सिटी में दाखिला दिला दिया. वह पढ़ कर २०१४ में भिलाई स्टील प्लांट में ट्रेनिंग के लिए आया और ट्रेंड होने के बाद नौकरी के लिए भटकने लगा. हमसे एक होटल में मिला तो नौकरी में सिफारिश करने का निवेदन किया. लेकिन नौकरी रखी हुयी तो नहीं है न? सो वह चला गया. गांव में उसकी माँ ने उसका हौसला और मनोबल बनाये रखा. उसने कंबाइंड डिफेन्स सर्विस (सीडीएसई) का एग्जाम दिया और कमाल देखिए कि सेलेक्ट हो गया. सेकंड लैफ्टिनेंट के पद पर उसकी नियुक्ति हुयी है. बड़े अधिकारी का पद है यह. जुलाई १५ से नवल एकेडमी केरल में उसकी ट्रेनिंग शुरू होगी. उसका नाम है सिद्धांत प्रधान, अंजना जी वह वंदनीया हैं जिनने इस सपूत को जन्म दिया. बिहार का नवादा है इनका गांव.

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