बच्चों के बीच उद्यान में था। वे चिड़ियों के पीछे भाग रहे थे। एक मुन्नी अपने भाई से रो रही थी, कि तित्ती पकल के दो। वह बेचारा तितली क्या पकड़ता, बहन को चुप कराने में लगा। न मानी तो उद्विग्न होकर बोला, 'तो जाओ मैं जा रहा हूँ फिर न मिलूंगा।' और वह वहीं सीमेंट-कुर्सी के नीचे छिप गया।
मुन्नी की सांसें टंग गईं। रोना भूल गयी और चारों तरफ देखती मासूमियत से बोली, 'भिया तहां हो ? तित्ती नईं लेना, आप आ जाओ न !'
फर्लांग दूरी पर कुछ नौजवान क्रिकेट खेल रहे थे और उसी से आगे तरुणों की एक टोली थी, जिनमें कुछ वाद-विवाद हो रहा था। अपुन रुक गए। देश की भावी पीढ़ी थी भई, भला कैसे न देखते ? ओ ! तो ये महिला सशक्तिकरण पर डिबेट कर रहे हैं। तभी दो तरुणियां आईं, उनके हाथ में बिस्कुट-पैकेट हैं। सभी मिलकर खाने लगे और उनके कहकहों से माहौल गुलज़ार हो गया। इसी बीच क्रिकेट खेलते नौजवानों की बॉल इस टोली के बीच आकर गिरी। एक नौजवान दौड़ता आया, इससे पहले ही तरुण बॉल पास कर चुका था। तभी जोड़ा बिस्कुट लेकर तरुणी आये हुए नौजवान के पास दौड़ी, 'भैया, इसे तो खाते जाइए।'
क्षण भर में फिर कहकहे लगने लगे और माहौल गुलज़ार हो गया। उधर तितलियां उड़ रही हैं और वह छुटकी मुन्नी और उसका भाई उन्हें पकड़ने उनके पीछे जान लगा रहे हैं।
क्या तो सुन्दर पीढ़ी है न हमारी ?
मुन्नी की सांसें टंग गईं। रोना भूल गयी और चारों तरफ देखती मासूमियत से बोली, 'भिया तहां हो ? तित्ती नईं लेना, आप आ जाओ न !'
फर्लांग दूरी पर कुछ नौजवान क्रिकेट खेल रहे थे और उसी से आगे तरुणों की एक टोली थी, जिनमें कुछ वाद-विवाद हो रहा था। अपुन रुक गए। देश की भावी पीढ़ी थी भई, भला कैसे न देखते ? ओ ! तो ये महिला सशक्तिकरण पर डिबेट कर रहे हैं। तभी दो तरुणियां आईं, उनके हाथ में बिस्कुट-पैकेट हैं। सभी मिलकर खाने लगे और उनके कहकहों से माहौल गुलज़ार हो गया। इसी बीच क्रिकेट खेलते नौजवानों की बॉल इस टोली के बीच आकर गिरी। एक नौजवान दौड़ता आया, इससे पहले ही तरुण बॉल पास कर चुका था। तभी जोड़ा बिस्कुट लेकर तरुणी आये हुए नौजवान के पास दौड़ी, 'भैया, इसे तो खाते जाइए।'
क्षण भर में फिर कहकहे लगने लगे और माहौल गुलज़ार हो गया। उधर तितलियां उड़ रही हैं और वह छुटकी मुन्नी और उसका भाई उन्हें पकड़ने उनके पीछे जान लगा रहे हैं।
क्या तो सुन्दर पीढ़ी है न हमारी ?
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