पैदा होने से लेकर अब तक अनेकों बार इस चितकबरी के कारनामें सुना चुके हैं। सोचे इसकी छवि भी दिखा ही दें। बेचारी ! शिकार सिखाने की तो छोड़िए, जब इसकी माँ को इससे लिपटकर रहने और सुरक्षा देकर पालने की जवाबदारी थी, तो जाने किस मज़बूरी के चलते वह दगा देकर चलती बनी। अब यह पोटी अकेली फंसी, तिसपर एक डरावना काला बिल्ला इसपर घात लगाए पीछे पड़ा कि मौका मिले और दबोचूँ।
इसकी दीन दशा पर कौन होगा जो न पसीजे ? हमारी दयाशील भौजाई ने पोसना शुरू किया। कटोरी से दूध पिलाने और कुछ खाने-पीने को देते रहने से वह चपल होने लगी। निखिल और नीतीश को देखा कि वे चाकू का बेट उसके पंजों के सामने कर रहे हैं और वह उस पर ऐसे झपट्टा मार रही है मानो वह बेट न होकर कोई चूहा हो जिसे अभी ले भागेगी। बड़ा मज़ा आया देखकर। अब बच्चे उसे ऐसे ही उछाल मारना सिखाने लगे। फिर तो धीरे-से उसने शिकार मारना भी शुरू कर दी। कुछ दिनों पहले तो जिस तरीके से वह मोटा-सा मूस मुँह में दाबे सीढ़ियों पर भागती दिखी, उसने तो उसके जौहर की नजीर ही पेश कर दी।
हमें उससे कोई बड़ा प्रेम न था, किन्तु उसकी क्या कहें! जैसे ही देखती, चली आती पीछे-पीछे ! म्याऊं-म्याऊं करती लिपट जाती पैरों से। कितना भी झटको टस-से-मस न होती। उसका प्रेम निराला था, निःस्वार्थ। धीरे-धीरे वह हमें अपना बनाने लगी थी, कि पता चला कोई ले गया उसे। पक्का है, उसे अब भी हमारी याद आती ही होगी। हमें तो नहीं भूलती वह।
इसकी दीन दशा पर कौन होगा जो न पसीजे ? हमारी दयाशील भौजाई ने पोसना शुरू किया। कटोरी से दूध पिलाने और कुछ खाने-पीने को देते रहने से वह चपल होने लगी। निखिल और नीतीश को देखा कि वे चाकू का बेट उसके पंजों के सामने कर रहे हैं और वह उस पर ऐसे झपट्टा मार रही है मानो वह बेट न होकर कोई चूहा हो जिसे अभी ले भागेगी। बड़ा मज़ा आया देखकर। अब बच्चे उसे ऐसे ही उछाल मारना सिखाने लगे। फिर तो धीरे-से उसने शिकार मारना भी शुरू कर दी। कुछ दिनों पहले तो जिस तरीके से वह मोटा-सा मूस मुँह में दाबे सीढ़ियों पर भागती दिखी, उसने तो उसके जौहर की नजीर ही पेश कर दी।
हमें उससे कोई बड़ा प्रेम न था, किन्तु उसकी क्या कहें! जैसे ही देखती, चली आती पीछे-पीछे ! म्याऊं-म्याऊं करती लिपट जाती पैरों से। कितना भी झटको टस-से-मस न होती। उसका प्रेम निराला था, निःस्वार्थ। धीरे-धीरे वह हमें अपना बनाने लगी थी, कि पता चला कोई ले गया उसे। पक्का है, उसे अब भी हमारी याद आती ही होगी। हमें तो नहीं भूलती वह।
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