बच्चों की चोरी
तो क्या छत्तीसगढ़ के सरकारी अस्पताल भी अब भगवान भरोसे ही चल रहे हैं? यह प्रश्र इसलिए है, कि राज्य के सरकारी अस्पतालों में अनेक गम्भीर किस्म की विसंगतियां लगातार सामने आ रही हैं। जिला चिकित्सालय दुर्ग में तो कल एक बच्चा ही चोरी चला गया! जिसका अब तक कोई अता-पता नहीं है। कितनी बड़ी और गम्भीर बात है यह, कि प्रसव पीड़ा से तड़पती एक गरीबन सरकारी अस्पताल दुर्ग में डिलवरी के लिए जाती है और डिलवरी में उसे लड़का प्राप्त होता है जिसे कुछ ही देर में चोरी कर लिया जाता है! सोचा जा सकता है, कि क्या हालत होगी उस मां का जिसका बच्चा उसकी आंखों के सामने से ही गायब हो जाए। क्या भरोसा करेगी वह सरकारी अस्पताल पर?
देखा जाए तो यह कोई पहला मामला नहीं है। अनेकों मामले हैं जिसमें नवजात बच्चों के इधर-उधर किए जाने और चोरी के मामले देखने को मिले हैं। यह तब है जब सरकार ने सुरक्षा के लिए अस्पतालों में अनेक प्रकार इन्तजामात किए हैं। एक पूरा अमला ही इसके लिए लगाया गया है, जिसमें भारी भरकम खर्च किए जा रहे हैं। पुलिस की व्यवस्था जो है सो अलग। फिर भी कैसे घटित हो रही हैं इस प्रकार की घटनाएं? क्या कोई अन्तर्राष्ट्रीय रैकेट काम कर रहा है, जो इस प्रकार की घटनाओं को सरंजाम देने में सरकारी मिशनरी से मिल कर अपना काम करने मे लगा है?
बताया जाता है, कि बच्चों की चोरी के पाशविक धन्धे में एक बड़ा गिरोह काम करता है। अनेकों ऐसे मामले सामने आए जिसमें पता चला कि बच्चा खरीदने वाली दम्पतियों से लेकर क्राइम जगत से जुड़े लोग अपना जाल फैलाकर रखते हैं। लेकिन सवाल यह उठता है, कि सरकारी अस्पताल जहां कि गरीब और बेसहारा सर्वहारा वर्ग के लोग बहुतायात में आते हैं उनकी सुरक्षा और सुविधा के लिए क्या कोई समझौता किया जा सकता है? आज भी पता चलता है कि सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों से लेकर दवाइयों तक का टोटा रहता है, फिर भी मरीज हैं कि बेचारे बड़ी उम्मीद से वहां जाते हैं। उसके बाद भी उनके साथ नाइन्साफी हो, तो फायदा क्या? देखा जाए तो प्रशासन ने अस्पतालों के प्रसूति कक्ष में सुरक्षा के पर्याप्त इन्तजामात कर रखे हैं। सीसीटीवी कैमरे तक लगाए गए हैं पर भी घटनाएं घट ही रही हैं। हैरत तो यह होती है कि ऐन घटना के वक्त ये सीसीटीवी कैमरे बन्द पाए जाते हैं जो सन्देह पैदा करते हैं और अनेक सवालों को जन्म देेते हैं। इसीलिए लगने लगता है, कि सरकार और प्रशासन की व्यवस्था में कहीं तो खामी है और ये सरकारी अस्पताल भी भगवान भरोसे ही चल रहे हैं। आखिर कब सुधरेगी इस प्रकार की कुव्यवस्था?
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