Thursday, 27 August 2015

  खुशी 

उदास था मैं
कि दिखी
रो रही फूल-सी बच्ची
उठा लिया गोद में
उसके रूई-से गालों  
और गुलाबी अधरों को
हौले-से थपकाया
जैसे मिली हो दस्तक
उसके हृदय-द्वार पर
खोए पिता की
लग गई सीने से
हिचकना बंद उसका
हमारी उदासी
बदल गयी पल में
खुशियों से सराबोर हो गए दोनों

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