Monday, 29 July 2013

जब मनुष्य मरता है तो जाता कहाँ है यह प्रश्न आज भी कुतूहल उत्पन्न करता है. विज्ञान कुछ कहता है तो धर्म कुछ और. नीद में मनुष्य की बुद्धि कहाँ चली जाती है , उसकी चेतना का क्या होता है, इसे लेकर आज भी मतैक्य है. मरने के बाद शरीर पंचतत्व में विलीन हो जाता है, बस यही भौतिक सचाई दिखती है . विज्ञान आज भी इसपर लगा हुआ है. छान्दोग्य ६. ८. १. में लिखा है कि निद्रा में जीव आत्मा के साथ ऐक्य धारण कर लेता है. वहीं छान्दोग्य ६. १५ में लिखा है- जब मनुष्य मरता है तब उसकी वाक् मन में अंतर्लीन हो जाती है. अंतर्मन प्राण मे , प्राण तेज़ में तथा अंत में तेज़ देवता में अंतर्लीन हो जाता है. आखिर है क्या?     

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