Tuesday, 15 September 2015

               बदलती सोच

नहीं टूटी चिड़ियों की लयबद्धता
तितली भी कहाँ तोड़ी नियम
गिलहरी वैसे ही रच रही माया
पुष्पों ने भी कहाँ बदला चोला
सब वही तो है जो चला आ रहा है
हाँ, बदली है कुछ ज़रूर
और वह है सोच
कि तोड़ दो नियम एकजाई हो
कि बन्धन है गुलामी
चिड़ियों की लयबद्धता
तितलियों का फर्फराना
गिलहरी का फुदकना
चाहते हो रोकना
इसके लिए पिंजड़ा लिए
घूम रहे हो

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