बदलती सोच
नहीं टूटी चिड़ियों की लयबद्धतातितली भी कहाँ तोड़ी नियम
गिलहरी वैसे ही रच रही माया
पुष्पों ने भी कहाँ बदला चोला
सब वही तो है जो चला आ रहा है
हाँ, बदली है कुछ ज़रूर
और वह है सोच
कि तोड़ दो नियम एकजाई हो
कि बन्धन है गुलामी
चिड़ियों की लयबद्धता
तितलियों का फर्फराना
गिलहरी का फुदकना
चाहते हो रोकना
इसके लिए पिंजड़ा लिए
घूम रहे हो
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